भारतीय संविधान: भारत के राष्ट्रपति नोट्स
यहां भारत के राष्ट्रपति पर विस्तृत नोट्स प्रस्तुत किए गए हैं, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, State PSC आदि) के लिए उपयोगी हैं। प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को स्पष्टीकरण के साथ समझाया गया है ताकि अवधारणाएँ स्पष्ट हों और स्मरण में आसानी हो। नोट्स को पुस्तक अध्याय की तरह संरचित किया गया है, जिसमें सभी परीक्षा-उन्मुख तथ्य शामिल हैं।
भारत के राष्ट्रपति भारतीय गणराज्य के संवैधानिक प्रमुख और प्रथम नागरिक हैं। अनुच्छेद 52 के अनुसार, भारत का एक राष्ट्रपति होगा। वे सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर (अनुच्छेद 53) और संविधान के संरक्षक हैं। हालांकि, भारत में संसदीय शासन प्रणाली होने के कारण राष्ट्रपति की शक्तियाँ मुख्यतः औपचारिक और प्रतीकात्मक हैं। अनुच्छेद 74 के अनुसार, राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना होता है, जो बाध्यकारी है (44वें संशोधन, 1978 द्वारा स्पष्ट)। कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे अस्पष्ट बहुमत, राष्ट्रपति विवेकाधीन शक्तियाँ प्रयोग कर सकते हैं।
स्पष्टीकरण:
- परीक्षा महत्व: अनुच्छेद 74 और 44वाँ संशोधन महत्वपूर्ण हैं। पहले, राष्ट्रपति सलाह को अस्वीकार कर सकते थे, लेकिन 44वें संशोधन ने इसे बाध्यकारी बनाया। यह संसदीय प्रणाली की आधारशिला है।
- उदाहरण: शमशेर सिंह बनाम भारत संघ (1974) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति एक रबर स्टैंप हैं, जो मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।
- स्मरण टिप: राष्ट्रपति को “संवैधानिक शीर्ष” और प्रधानमंत्री को “वास्तविक कार्यकारी” समझें।
राष्ट्रपति का निर्वाचन
राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है (अनुच्छेद 54)। इसमें शामिल हैं:
- संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य।
- राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों (दिल्ली, पुदुचेरी) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
- ध्यान दें: नामित सदस्य (जैसे राज्यसभा के 12 मनोनीत या लोकसभा के 2) और विधान परिषद के सदस्य मतदान में भाग नहीं लेते।
मत मूल्य की गणना
- लोकसभा/राज्यसभा सदस्य: कुल मत मूल्य = (राज्यों के विधायकों के कुल मत मूल्य) ÷ (संसद के निर्वाचित सदस्यों की संख्या)।
- विधानसभा सदस्य: मत मूल्य = (राज्य की जनसंख्या, 1971 जनगणना) ÷ (विधानसभा की कुल सीटें) × 1000।
- उद्देश्य: संघीय संतुलन बनाए रखना, ताकि संसद और राज्य विधानसभाओं के मतों का वजन बराबर हो।
निर्वाचन प्रक्रिया:
- एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) का उपयोग।
- उम्मीदवार को जीत के लिए 50% + 1 मत (कोटा) चाहिए।
- निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324) द्वारा आयोजित।
- विवाद: उच्चतम न्यायालय में (अनुच्छेद 71)।
एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote)
एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote, STV) एक मतदान प्रणाली है, जिसका उपयोग भारत में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन (अनुच्छेद 55 और 66) के लिए किया जाता है। यह आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) का एक रूप है, जिसमें मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवारों को प्राथमिकता (Preference) के क्रम में मत देते हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतों का अधिकतम उपयोग हो और विजेता उम्मीदवार को व्यापक समर्थन प्राप्त हो।
कोटा की गणना
कोटा की गणना ड्रूप फॉर्मूला (Droop Quota) द्वारा की जाती है:
कोटा=
यह सुनिश्चित करता है कि विजेता को 50% से अधिक मत प्राप्त हों।
प्रक्रिया (चरण-दर-चरण)
- मतदान: प्रत्येक मतदाता एक मतपत्र पर उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्रम (1, 2, 3…) में चिह्नित करता है।
- पहली गणना: सभी मतपत्रों की पहली प्राथमिकता के मत गिने जाते हैं।
- कोटा की जाँच: यदि कोई उम्मीदवार कोटा प्राप्त करता है, तो वह विजेता घोषित होता है।
- अतिरिक्त मतों का स्थानांतरण: यदि किसी उम्मीदवार को कोटे से अधिक मत मिलते हैं, तो अतिरिक्त मतों को दूसरी प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाता है।
- उम्मीदवार का उन्मूलन: यदि कोई उम्मीदवार कोटा प्राप्त नहीं करता, तो सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार को हटाया जाता है और उसके मत दूसरी प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किए जाते हैं।
- प्रक्रिया दोहराई जाती है: यह तब तक चलता है जब तक कोई उम्मीदवार कोटा प्राप्त न कर ले या केवल एक उम्मीदवार शेष न रह जाए।
उदाहरण के साथ व्याख्या
मान लीजिए, राष्ट्रपति निर्वाचन के लिए 100 मतदाता हैं और 4 उम्मीदवार (A, B, C, D) हैं। प्रत्येक मतदाता ने प्राथमिकता क्रम में मत दिया है।
विजेता को कम से कम 51 मत चाहिए।
चरण 2: पहली प्राथमिकता के मतों की गणना मान लीजिए, पहली प्राथमिकता के मत इस प्रकार हैं:
- उम्मीदवार A: 40 मत
- उम्मीदवार B: 30 मत
- उम्मीदवार C: 20 मत
- उम्मीदवार D: 10 मत
परिणाम: कोई भी उम्मीदवार कोटा (51) तक नहीं पहुँचा।
चरण 3: न्यूनतम मत वाले उम्मीदवार का उन्मूलन
- उम्मीदवार D के पास सबसे कम मत (10) हैं, इसलिए उसे हटाया जाता है।
- D के 10 मतों की दूसरी प्राथमिकता जाँची जाती है। मान लीजिए:
- 6 मतों में दूसरी प्राथमिकता A को।
- 3 मतों में दूसरी प्राथमिकता B को।
- 1 मत में कोई दूसरी प्राथमिकता नहीं (यह मत रद्द)।
चरण 4: मतों का पुनर्वितरण नया मत वितरण:
- उम्मीदवार A: 40 + 6 = 46 मत
- उम्मीदवार B: 30 + 3 = 33 मत
- उम्मीदवार C: 20 मत
- उम्मीदवार D: हटाया गया
परिणाम: अभी भी कोई कोटा (51) तक नहीं पहुँचा।
चरण 5: अगले न्यूनतम मत वाले उम्मीदवार का उन्मूलन
- उम्मीदवार C के पास सबसे कम मत (20) हैं, उसे हटाया जाता है।
- C के 20 मतों की दूसरी प्राथमिकता:
- 15 मत A को।
- 5 मत B को।
चरण 6: मतों का पुनर्वितरण नया मत वितरण:
- उम्मीदवार A: 46 + 15 = 61 मत
- उम्मीदवार B: 33 + 5 = 38 मत
परिणाम: उम्मीदवार A को 61 मत मिले, जो कोटा (51) से अधिक है। उम्मीदवार A विजेता घोषित।
वैकल्पिक परिदृश्य: यदि A को कोटा मिलने के बाद अतिरिक्त मत (61 – 51 = 10) हैं, तो ये मत दूसरी प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किए जाएँगे। लेकिन इस मामले में, A पहले ही जीत चुका है, इसलिए प्रक्रिया समाप्त।
महत्वपूर तथ्य और स्पष्टीकरण:
1971 जनगणना का उपयोग:
- क्यों? 42वें संशोधन (1976) ने जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करने के लिए 1971 की जनगणना को आधार बनाया। इसे 84वें संशोधन (2001) द्वारा 2026 तक बढ़ाया गया। यह सुनिश्चित करता है कि जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को अनुचित लाभ न मिले।
प्रथम राष्ट्रपति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1950-1962), एकमात्र राष्ट्रपति जिन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए।
- स्पष्टीकरण: उनका कार्यकाल 12 वर्ष का था, जो सबसे लंबा है।
राष्ट्रपति की योग्यताएँ
अनुच्छेद 58:
- भारत का नागरिक हो।
- 35 वर्ष की आयु पूरी।
- लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता (अनुच्छेद 84)।
- कोई लाभ का पद न धारण करता हो।
अयोग्यताएँ:
- पागल या दिवालिया न हो।
- आपराधिक सजा से अयोग्य न ठहराया गया हो।
- संसद/विधानमंडल का सदस्य न हो (पद ग्रहण से पहले त्यागना होगा)।
राष्ट्रपति की शपथ या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति पद ग्रहण से पहले मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेते हैं।
- शपथ का उद्देश्य: संविधान की रक्षा, राष्ट्र की सेवा, और सभी के प्रति निष्पक्षता।
- प्रारूप: तृतीय अनुसूची में।
- मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति: यदि CJI उपलब्ध नहीं, तो वरिष्ठतम न्यायाधीश।
राष्ट्रपति का कार्यकाल
अनुच्छेद 56:
- कार्यकाल: 5 वर्ष, पद ग्रहण की तिथि से।
- पुनर्निर्वाचन: योग्य, कोई सीमा नहीं।
- त्यागपत्र: उपराष्ट्रपति को।
- पद पर बने रहना: उत्तराधिकारी के पद ग्रहण तक।
महत्वपूर्ण तथ्य और स्पष्टीकरण:
- सबसे लंबा कार्यकाल: डॉ. राजेंद्र प्रसाद (12 वर्ष, 1950-1962)।
- स्पष्टीकरण: वे एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए।
- सबसे छोटा कार्यकाल: डॉ. जाकिर हुसैन (1967-1969, मृत्यु के कारण)।
- परीक्षा महत्व: कार्यकाल से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
राष्ट्रपति का वेतन, भत्ते और पेंशन
अनुच्छेद 59(3):
- वेतन: संसद द्वारा निर्धारित (वर्तमान: 5 लाख रुपये मासिक, 2025 तक)।
- आवास: राष्ट्रपति भवन।
- भत्ते: चिकित्सा, यात्रा, कर-मुक्त।
- पेंशन: सेवा समाप्ति पर आधा वेतन।
महत्वपूर्ण तथ्य और स्पष्टीकरण:
- वेतन का स्रोत: भारत का संचित कोष (Consolidated Fund of India), संसद की मंजूरी बिना कटौती।
राष्ट्रपति की शक्तियाँ एवं कार्य
राष्ट्रपति की शक्तियाँ अनुच्छेद 53 में निहित हैं, लेकिन अनुच्छेद 74 के अनुसार मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना बाध्यकारी है। कुछ परिस्थितियों में विवेकाधीन शक्तियाँ प्रयोग की जा सकती हैं।
1. कार्यकारी शक्तियाँ (Executive Powers)
- प्रधानमंत्री की नियुक्ति (अनुच्छेद 75): लोकसभा में बहुमत वाले दल के नेता को।
- अन्य नियुक्तियाँ:
- मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री की सलाह पर)।
- मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश (अनुच्छेद 124, 217)।
- राज्यपाल (अनुच्छेद 155)।
- अटॉर्नी जनरल (अनुच्छेद 76), CAG (अनुच्छेद 148), UPSC अध्यक्ष (अनुच्छेद 316)।
- राजदूत।
विवेकाधीन शक्तियाँ:
- जब कोई दल स्पष्ट बहुमत न हो, जैसे 1998 में वाजपेयी की नियुक्ति।
- स्पष्टीकरण: सामान्यतः सलाह बाध्यकारी, लेकिन अस्पष्ट बहुमत में राष्ट्रपति अपनी विवेकशक्ति का उपयोग कर सकते हैं।
- महत्वपूर्ण मामला: शमशेर सिंह (1974) – राष्ट्रपति की सलाह पर बाध्यता।
2. विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)
- संसद सत्र: बुलाना, स्थगित करना, भंग करना (अनुच्छेद 85)।
- संसद को संबोधन: प्रत्येक सत्र के प्रारंभ में (अनुच्छेद 87)।
- विधेयक:
- साधारण विधेयक: हस्ताक्षर, पुनर्विचार के लिए लौटाना, या पॉकेट वीटो।
- धन विधेयक: अस्वीकृति नहीं।
- अध्यादेश: संसद सत्र न होने पर (अनुच्छेद 123), 6 सप्ताह + 6 सप्ताह तक वैध।
- राज्य विधेयक: आरक्षण (अनुच्छेद 200-201)।
- संयुक्त अधिवेशन: विधायी गतिरोध पर (अनुच्छेद 108)।
- मनोनीत सदस्य: राज्यसभा में 12 (कला, साहित्य, विज्ञान आदि)।
महत्वपूर्ण तथ्य और स्पष्टीकरण:
- पॉकेट वीटो: राष्ट्रपति विधेयक को लटकाए रख सकते हैं (उदा. 1986 में पोस्ट ऑफिस विधेयक)।
- स्पष्टीकरण: यह अनुच्छेद 74 की बाध्यता से बाहर है।
- अध्यादेश: 44वें संशोधन ने इसकी समीक्षा को संभव बनाया।
- मामला: आर.सी. कूपर (1970) – अध्यादेश की न्यायिक समीक्षा।
3. न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)
- क्षमादान (अनुच्छेद 72):
- मृत्युदंड, आजीवन कारावास आदि में क्षमा, परिवर्तन, अवकाश, लघुकरण।
- सैन्य अदालतें छोड़कर।
- महत्वपूर्ण मामला: केहर सिंह (1989) – क्षमादान की न्यायिक समीक्षा संभव।
स्पष्टीकरण:
- क्षमादान राष्ट्रपति की मानवीय शक्ति है, जो दया याचिका पर लागू होती है।
4. आपातकालीन शक्तियाँ (Emergency Powers)
- राष्ट्रीय आपात (अनुच्छेद 352): युद्ध, बाहरी आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह।
- राज्य आपात (अनुच्छेद 356): संवैधानिक तंत्र विफल होने पर।
- वित्तीय आपात (अनुच्छेद 360): आर्थिक स्थिरता खतरे में।
महत्वपूर्ण तथ्य और स्पष्टीकरण:
- 44वाँ संशोधन (1978): ‘सशस्त्र विद्रोह’ शब्द जोड़ा, संसद अनुमोदन अनिवार्य।
- महत्वपूर्ण मामला: एस.आर. बोम्मई (1994) – अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर रोक।
- स्पष्टीकरण: इसने केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत किया।
- परीक्षा महत्व: आपातकाल के प्रकार, अनुच्छेद, और बोम्मई मामला अक्सर पूछे जाते हैं।
- स्मरण टिप: 352, 356, 360 को क्रम में याद करें।
5. सैन्य शक्तियाँ
- सर्वोच्च कमांडर (अनुच्छेद 53)।
- युद्ध घोषणा संसद की मंजूरी से।
स्पष्टीकरण: यह प्रतीकात्मक है, वास्तविक निर्णय मंत्रिपरिषद लेती है।
6. कूटनीतिक शक्तियाँ
- संधियाँ, राजदूत नियुक्ति।
परीक्षा महत्व: यह सामान्य ज्ञान प्रश्नों में आता है।
7. वीटो शक्तियाँ
- निरपेक्ष वीटो: संविधान संशोधन विधेयक।
- निलंबनकारी वीटो: साधारण विधेयक लौटाना।
- पॉकेट वीटो: विधेयक पर कोई कार्रवाई न करना।
स्पष्टीकरण:
- पॉकेट वीटो का उदाहरण: 1986 में ज्ञानी जैल सिंह द्वारा पोस्ट ऑफिस विधेयक।
- परीक्षा महत्व: वीटो के प्रकार और उदाहरण महत्वपूर्ण।
विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियाँ
अनुच्छेद 361:
- पद पर रहते कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं।
- नागरिक मुकदमे के लिए 2 माह पूर्व सूचना।
- व्यक्तिगत कार्यों के लिए उत्तरदायी, आधिकारिक नहीं।
स्पष्टीकरण:
- यह राष्ट्रपति की गरिमा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
- परीक्षा महत्व: अनुच्छेद 361 और अपवाद (चुनाव याचिका) को याद रखें।
महाभियोग द्वारा पदच्युति
अनुच्छेद 61:
- कारण: संविधान का उल्लंघन।
- प्रक्रिया:
- संसद के किसी सदन से प्रस्ताव।
- 14 दिन पूर्व सूचना।
- 2/3 बहुमत से पारित।
- दूसरे सदन में जांच, राष्ट्रपति को बचाव का अधिकार।
महत्वपूर्ण तथ्य और स्पष्टीकरण:
- अब तक कोई महाभियोग नहीं: भारत में यह प्रक्रिया कभी लागू नहीं हुई।
- प्रेरणा: अमेरिकी संविधान से।
राष्ट्रपति पद की रिक्ति एवं उत्तराधिकार
अनुच्छेद 62:
- रिक्ति पर 6 माह में निर्वाचन।
- उत्तराधिकार: उपराष्ट्रपति → मुख्य न्यायाधीश → वरिष्ठतम न्यायाधीश।
महत्वपूर्ण तथ्य और स्पष्टीकरण:
- उदाहरण: 1969 में जाकिर हुसैन की मृत्यु पर वी.वी. गिरी कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।
- परीक्षा महत्व: उत्तराधिकार क्रम और अनुच्छेद 62 महत्वपूर्ण।
- स्मरण टिप: अनुच्छेद 56 (कार्यकाल) और 62 को जोड़कर पढ़ें।
महत्वपूर्ण तथ्य और स्पष्टीकरण
- वर्तमान राष्ट्रपति (2025): द्रौपदी मुर्मू (2022 से, प्रथम आदिवासी महिला)।
- स्पष्टीकरण: यह ऐतिहासिक है, क्योंकि वे पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं।
- महिला राष्ट्रपति:
- प्रतिभा पाटिल (2007-2012, प्रथम महिला)।
- द्रौपदी मुर्मू (2022-वर्तमान)।
- अंतरिम राष्ट्रपति:
- वी.वी. गिरी, मोहम्मद हिदायतुल्लाह, बी.डी. जत्ती।
- स्पष्टीकरण: अंतरिम राष्ट्रपति तब नियुक्त होते हैं जब पद रिक्त हो।
- महत्वपूर्ण मामले:
- शमशेर सिंह (1974): राष्ट्रपति रबर स्टैंप।
- रामास्वामी (1993): विवेकाधीन शक्तियाँ।
- एस.आर. बोम्मई (1994): अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग।
- केहर सिंह (1989): क्षमादान की समीक्षा।
- संशोधन:
- 42वाँ (1976): सलाह बाध्यकारी, 1971 जनगणना।
- 44वाँ (1978): आपातकाल और अध्यादेश पर नियंत्रण।